अहंकार को सभी धर्मों व् विद्वानों ने धर्म मार्ग की सबसे बड़ी बाधा माना है,
…………………….अहंकार एक ऐसा मानवीय गुण(अवगुण) है, जो जन्म के बाद से ही हमारे ऊपर नियंत्रण कर लेता है और क्रोध , ईर्ष्या , स्वार्थ ,घृणा , बदले की भावना और अन्य अवगुणों को जन्म देता है। यह एक ऐसा विष है जो हमारे सभी गुणों को दूषित कर हमें संसारिकता में फ़साये रखता है ।लेकिन मित्रों, जिस प्रकार विष ही विष को मारता है, उसी प्रकार हम इस अहंकार रूपी विष का प्रयोग करके, अपने स्वभाव व् अंतर्मन में अन्दर तक फैले विभिन्न प्रकार के विषों को मार सकते है। हाँ, जिस प्रकार विष चिकित्सा में सावधानी से काम लेना पड़ता है, उसी प्रकार यहाँ भी सावधानी से काम लेना पड़ेगा। प्रतिदिन आत्म समीक्षा करनी होगी कि यह दवा उपचार ही करती रहे , हानि न पहुँचाने पाए।
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