Saturday, October 29, 2011

घर गृहस्थ का कार्य करते समय स्मरण रहे कि सब कुछ भगवान का दिया हुआ है। व्यक्ति की जिसके साथ प्रीत होती है। उसका समय संकल्प शक्ति धन व मन वही लगता है।

प्रजापिता ब्रह्मकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के उप सेवा केंद्र पर मुख्यालय माउंट आबू से पधारीं राजयोगिनी मनोरमा बहन का शुभागमन हुआ। इस मौके पर स्नेह मिलन समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बोलते हुए मनोरमा बहन ने कहा कि विराट सृष्टि चक्र में सब कुछ पूर्व निश्चित है। यह निश्चितता ही निश्चिंत का आधार है। किंतु इसे अज्ञानता के बस मानव स्वीकार नहीं करता है। मानव अपनी बुद्धि तथा देह के अंहकार में परमात्मा से प्रीत नहीं कर पा रहा है। उन्होंने कहा कि परमात्मा ने प्रीत का पैमाना नहीं बनाया है। मनुष्य भगवान की सर्वश्रेष्ठ रचना है। कृष्ण महाभारत के युद्ध के दौरान विश्राम के क्षणों में भी विश्राम नहीं करके रथ के घोड़ों की सेवा करते रहते थे, तभी कर्मयोगी कहलाए। इसी तरह घर गृहस्थ का कार्य करते समय स्मरण रहे कि सब कुछ भगवान का दिया हुआ है। व्यक्ति की जिसके साथ प्रीत होती है। उसका समय संकल्प शक्ति धन व मन वही लगता है। इस प्रकार हम परमात्म प्रीत में स्वयं को अर्पण कर दें। कार्यक्रम का शुभारंभ ब्रह्मकुमारी प्रविणा बहन द्वारा प्रस्तुत प्रीत के गीत के साथ किया गया। भ्राता कल्याण प्रसाद द्वारा शब्दों से स्वागत किया गया। ब्रह्मकुमारी प्रीति, बबीता, प्रवीण, कमलेश एवं कनक बहन द्वारा अतिथियों का गुलाबासी तिलक पुष्प से स्वागत किया गया। कार्यक्रम में प्रो.उदय सिंह, कल्याण प्रसाद बाबूलाल उपाध्याय, दयाराम योगेंद्र मिटठ्न लाल भरतपुर के मौजी लाल, सुधीर, भ्राता सुरेश उप मन, एकाउंट अधिकारी ब्रह्मकुमार जोशी अमर सिंह व अन्य सेवा केंद्रों से आए लोग महिलाएं उपस्थित थीं।

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