परमात्मा किसी से भेद नहीं करता। जिसने सबका सृजन किया है वह किसी से भेद करेगा भी क्यूं? माया के भ्ावरजाल में फंसकर उससे दूरी तो हमने ही बना रखी है। उससे नाता जोड़ना चाहते हो तो प्रेमपूर्वक आकर मिलो। लग जाओ साधना में नि:स्वार्थ भाव से वह तुम्हारे स्वागत को आतुर है।
उक्त विचार रेलवे स्टेडियम प्रांगण में चल रहे गीता सार प्रवचन में प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विवि की ख्याति लब्ध विद्वान ब्र.कु. उषा बहन ने व्यक्त किये। रविवार को प्रसंग को आगे बढ़ाते हुये उन्होंने कहा कि गीता में श्रीकृष्ण अर्जुन को परमात्मा से मिलन का रहस्य समझाते हैं। भगवान कहते हैं कि जो मेरी अनन्य भाव से सेवा करता है वह मेरा मित्र तथा मैं उसका मित्र हूं। गृहस्थ जीवन में रहकर भी भक्ति साधना करते रहने के बारे में उन्हों ने कहा कि कुछ भी कार्य-व्यवहार करते समय भगवान को नहीं भूलना चाहिए। भक्ति जानना चाहते हो तो विष्णु भगवान के शंख, सुदर्शन चक्र, गदा और कमल से सीख लो। शंख का स्वभाव ओम् ध्वनि का उच्चारण करना है। सुदर्शन का भाव हर एक के अंदर शुभ का दर्शन करना, गदा का ज्ञान का प्रतीक है तथा कमल से सीख मिलती है कि कीचड़ में रहकर भी पवित्रता के शीर्ष पर रहो।
इससे पूर्व महापौर श्रीमती अंजू चौधरी ने उषा बहन को स्मृति चिह्न भेंटकर सम्मान दिया और प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय द्वारा किये जा रहे सेवाकार्यो की सराहना की।
इंसर्ट- बीमारी के बावजूद नही टूटा प्रवचन करने हौसला
गोरखपुर। ब्र.कु. उषा बहन जबसे गोरखपुर आयी हैं उनका समय बेहद व्यस्त रहा है। प्रतिदिन सुबह 6.30 से 8 बजे तथा शाम को भी इसी वक्त कथा और ध्यान में उनका समय गुजर रहा है। इसके अलावा दिन के समय शहर में किसी न किसी आध्यात्मिक कार्यक्रमों आदि में उनका आना जाना रहता है। रविवार को सुबह कथा के बाद सिविल लाइन्स स्थित गोकुल अतिथि भवन में उनका कार्यक्रम था। थकान की वजह से उनकी तबियत खराब हो गयी बावजूद इसके उन्होंने शाम का प्रवचन नही छोड़ा।
ब्रह्माकुमार भगवान भाई ब्रह्माकुमारीज़ माउंट आबू राजस्थान भारत ने अब तक 5000 स्कूल , कॉलेजों और 800 जेल में प्रोग्राम कर इंडिया बुक ऑफ रिकार्ड में अपना नाम दर्ज किया है ,नैतिक मूल्य पर लगभग 2000 अधिक लेख भी लिखे है ३२ वर्षो से माउंट आबू में ईश्वरीय सेवा में समर्पित है
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