भगवान दगडू चवरे मुकाम तलेवाडी तालुका आटपाडी जिला सांगली
भगवान दगडू चवरे मुकाम तलेवाडी तालुका आटपाडी जिला सांगली
नैतिक शिक्षा --राजयोगी भगवानभाई
सातारा, दि. 15 : प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालयाचे मुख्यालय असलेल्या माऊंट अबू येथील ब्रह्माकुमार भगवानभाईंनी केलेल्या उल्लेखनीय कामगिरीची दखल घेवून त्यांच्या कार्याची "इंडिया बुक ऑफ रेकार्ड' मध्ये नुकतीच नोंद झाली असून दिल्ली येथे एका विशेष समारंभामध्ये इंडिया बुक ऑफ रेकार्डचे मुख्य संपादक विश्वरूपराय चौधरी यांच्या हस्ते त्यांना सन्मानित करण्यात आले.
भगवानभाईंनी आतापर्यंत भारतातील विविध प्रांतातील 5000 शाळा, महाविद्यालयांमध्ये जाऊन लाखो विद्यार्थ्यांना मूल्यनिष्ठ शिक्षणाद्वारे नैतिक व अध्यात्मिक विकासासाठी उद्बोधन केले आहे. 800 कारागृहांमध्ये जाऊन हजारो कैद्यांना गुन्हेगारी सोडून आपल्या जीवनामध्ये सद्भावना, मूल्य तसेच मानवतेला स्थापित करण्यासाठी प्रेरित केले आहे. या कार्याची नोंद घेवून त्यांची या पुरस्कारासाठी निवड करण्यात आली.
सत्कारानंतर प्रतिक्रिया व्यक्त करताना ब्र. कु.भगवानभाई म्हणाले, समाजामधील भ्रष्टाचार, व्यसनाधिनता, गुन्हेगारी समाप्त करावयाची असेल तर त्यासाठी शिक्षणामध्ये परिवर्तनाची आवश्यकता आहे. शाळा/ महाविद्यालयांमधूनच समाजाच्या प्रत्येक क्षेत्रामध्ये व्यक्ती प्रवेश करते. आजचा विद्यार्थीच उद्याचा समाज आहे. म्हणूनच समाजाच्या विकासासाठी शिक्षणामध्ये मूल्य व अध्यात्मिकतेचा समावेश करण्याची आवश्यकता आहे.
सांगली जिल्ह्यात आटपाडी तालुक्यातील तळेवाडी या छोट्याशा खेड्यात एका निरक्षर व गरीब कुटुंबात जन्मलेल्या भगवानभाईंना लिहिण्या- वाचण्यासाठी वही, पुस्तकेसुध्दा मिळत नव्हती. वयाच्या 11 वर्षी त्यांनी शाळेत जायला सुरूवात केली. ते जुन्या रद्दीमधील वह्यांची कोरी पाने व शाईने लिहिलेली पाने पाण्याने धुवून, सुकवून त्या पानांचा उपयोग लिहिण्यासाठी करीत. अशाच रद्दीमध्ये त्यांना ब्रह्माकुमारी संस्थेच्या एका पुस्तकाची काही पाने मिळाली. या रद्दीतील पानानींच त्यांचे जीवन बदलून गेले. त्या पानावर असलेल्या पत्त्यावरून ते ब्रह्माकुमारीसंस्थेमध्ये पोहचले व तेथील ईश्वरीय ज्ञान व राजयोगाचा अभ्यास करून आपले मनोबल वाढविले व त्या फलस्वरूप माऊंट अबू येथील आपले सेवाकार्य सांभाळून आजपर्यंत त्यांनी 5000 शाळा, महाविद्यालये व 800 कारागृहात जाऊन या सेवेचे एक रेकॉर्ड प्रस्थापित केले.
वर्तमानसमयी ब्रह्माकुमार भगवानभाई ब्रह्माकुमारी विश्वविद्यालयाच्या शांतीवन या मुख्यालयातील विशाल किचनमध्ये सेवारत असून अनेक मासिकातून तसेच वृत्तपत्रातून आतापर्यंत 2000 हून अधिक लेख लिहिले आहेत. त्यांना मिळालेल्या या सन्मानाबद्दल सातारा सेवाकेंद्राच्या संचालिका ब्रह्माकुमारी रूक्मिणी बहेनजी व शिक्षणाधिकारी (माध्य.) मकरंद गोंधळी यांनी त्यांचे अभिनंदन केले
बीके भगवान 1987 से भारत के विभिन्न प्रांतों में जाकर हजारों स्कूली बच्चों व जेलों में बंद कैदियों में मानवता का बीज बोते रहे। मिडिल व हाईस्कूलों के अलावा कॉलेज, आईटीआई सहित कई संस्थाओं में उनके आह्वान पर युवा अध्यात्म की राह पर चल पड़े हैं। अपने मिशन को सफलता दिलाने के लिए उन्होंने पदयात्रा, मोटरसाइकिल व साइकिल यात्रा सहित शिक्षा अभियान, ग्राम विकास अभियान कार्यक्रम संचालित किए। बीके भगवान भाई के अनुसार अगर समाज में व्याप्त भ्रष्टाचार, कुरीतियां, बुराइयां, व्यसन,नशा को समाप्त करना है तो स्कूलों में शिक्षा में परिवर्तन करने होंगे।
भगवान भाई ने अपने जीवन के रहस्य खोलते हुए कहा कि उनके परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर थी, जिसके चलते 11 साल की उम्र तक वे स्कूल नहीं गए। पढऩे की ललक होने के कारण गांव के स्कूल पहुंचे तो उन्हें टीचर्स ने कक्षा 5वीं में बैठाया। उन्होंने 5वीं से ही पढऩा शुरू किया। दुकानदार से पुरानी लिखी डायरियां लाकर पानी से साफ कर वे फिर इसका इस्तेमाल करते थे, ऐसे में एक दिन ब्रह्माकुमारी संस्था की डायरी हाथ लगी, जिससे पढ़कर वे काफी प्रभावित हुए। मुसाफिरों को पानी बेचकर 10 रुपए कमाए और माउंटआबू संस्था को भेजकर राजयोग की जानकारी मंगाई। पढऩे के बाद से जीवन में बदलाव आ गया और वे पूरी तरह संस्था के लिए समर्पित हो गए। ३००० से अधिक विषयों पर वे लेख लिख चुके हैं, जो हिंदी ज्ञानामृत, अंग्रेजी-द वल्र्ड रिनिवल, मराठी-अमृत कुंभ, उडिय़ा-ज्ञानदर्पण में छपते रहते हैं। इसके साथ ही वीडियो क्लासेस, ब्लॉग्स द्वारा ईश्वरीय संदेश देते हैं।
नैतिक शिक्षा से बनेगा सौहार्दपूर्ण समाज
कटनी। आज हम विकसित देशों की श्रेणी में खड़े होने का भरपूर प्रयास कर रहे है। इसके साथ सफलता भी मिल रही है। परंतु समाज में फैल रही दुर्भावना और हिंसा चिंता का सबब बनती जा रही है। इसके लिए जरूरी है कि व्यक्तिगत स्तर पर सकारात्मक आंतरिक चेतना के विकास को महत्व दिया जाए। उक्त उद्गार प्रजापति ब्रम्हाकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के पूरे भारत में 5 हजार स्कूल में नैतिक शिक्षा का अलख जगाकर इंडिया बुक आॅफ रिकार्ड में अपना नाम दर्ज कराने वाले राजयोगी डायमंड इंग्लिश उच्च माध्यमिक विद्यालय माधव नगर के विद्यार्थियों को जीवन में नैतिक शिक्षा का महत्व विषय पर संबोधित करते हुए राजयोगी भगवानभाई ने कहा कि आज समाज, देश व विश्व की क्या स्थिति है इसके बारे में हम अच्छी तरह जानते है कि केवल भौतिक विकास से ही हमारा सर्वांगीण विकास नहीं हो सकता। नैतिक विकास से समाज और परिवार में मूल्य विकसित होते है। इससे ही पारिवारिक सामाजिक और वैश्विक स्तर पर संपूर्ण रूप से विकसित हो सकेंगे। उन्होंने आगे बताया कि आज जितना हम विकास पर ध्यान रखेंगे अपने आंतरिक शक्तियों को जागृत करेंगे उतना युवाओं सशक्तिकरण आएगा। युवाओं को अपने शक्तियां रचनात्मक कार्य में लगाये। उन्होंने कहा कि यदि अपराधमुक्त समाज चाहित तो मानवीय, नैतिक शिक्षा द्वारा संस्कारित युवाओं की निर्मित करे। इसके लिए युवाओं को आगे आना चाहिए। उन्होंने युवाओं को आंतरिक रूप से सशक्त होकर लोगों की सेवा करने के लिए आगे जाने का आव्हान किया।
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लैबels: प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय bk bhagwan बीrahma kumari
आटपाडी सांगली चे ब्रह्माकुमार भगवान भाई चे नाव इंडिया बुक ऑफ़ रेकॉर्ड्स मधे नोंद
आटपाडी सांगली चे ब्रह्माकुमार भगवान भाई चे नाव इंडिया बुक ऑफ़ रेकॉर्ड्स मधे नोंद
नैतिक शिक्षा से बनेगा सौहार्दपूर्ण समाज
कटनी। आज हम विकसित देशों की श्रेणी में खड़े होने का भरपूर प्रयास कर रहे है। इसके साथ सफलता भी मिल रही है। परंतु समाज में फैल रही दुर्भावना और हिंसा चिंता का सबब बनती जा रही है। इसके लिए जरूरी है कि व्यक्तिगत स्तर पर सकारात्मक आंतरिक चेतना के विकास को महत्व दिया जाए। उक्त उद्गार प्रजापति ब्रम्हाकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के पूरे भारत में 5 हजार स्कूल में नैतिक शिक्षा का अलख जगाकर इंडिया बुक आॅफ रिकार्ड में अपना नाम दर्ज कराने वाले राजयोगी डायमंड इंग्लिश उच्च माध्यमिक विद्यालय माधव नगर के विद्यार्थियों को जीवन में नैतिक शिक्षा का महत्व विषय पर संबोधित करते हुए राजयोगी भगवानभाई ने कहा कि आज समाज, देश व विश्व की क्या स्थिति है इसके बारे में हम अच्छी तरह जानते है कि केवल भौतिक विकास से ही हमारा सर्वांगीण विकास नहीं हो सकता। नैतिक विकास से समाज और परिवार में मूल्य विकसित होते है। इससे ही पारिवारिक सामाजिक और वैश्विक स्तर पर संपूर्ण रूप से विकसित हो सकेंगे। उन्होंने आगे बताया कि आज जितना हम विकास पर ध्यान रखेंगे अपने आंतरिक शक्तियों को जागृत करेंगे उतना युवाओं सशक्तिकरण आएगा। युवाओं को अपने शक्तियां रचनात्मक कार्य में लगाये। उन्होंने कहा कि यदि अपराधमुक्त समाज चाहित तो मानवीय, नैतिक शिक्षा द्वारा संस्कारित युवाओं की निर्मित करे। इसके लिए युवाओं को आगे आना चाहिए। उन्होंने युवाओं को आंतरिक रूप से सशक्त होकर लोगों की सेवा करने के लिए आगे जाने का आव्हान किया।
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