Saturday, November 12, 2011

शिव तथा शंकर में अंतर बहुत से लोग शिव और शंकर को एक ही मानते है, परन्तु वास्तव में एन दोनों में भिन्नता है I आप देखते है की दोनों की प्रतिमाएं भी

शिव तथा शंकर में अंतर
बहुत से लोग शिव और शंकर को एक ही मानते है, परन्तु वास्तव में एन दोनों में भिन्नता है I आप देखते है की दोनों की प्रतिमाएं भी अलग-अलग आकर वाली होती है I शिव की प्रतिमा अंडाकार अथवा अन्गुष्ठाकर होती है जबकि महादेव शंकर की प्रतिमा शारीरिक आकार वाली होती है इ यह उन दोनों का अलग-अलग परिचय, जो की परमपिता परमात्मा शिव ने अब स्वयं हमें समझाया है तथा अनुभव कराया है स्पष्ट किया जा रहा है :-
महादेव शंकर
०१. यह ब्रह्मा तथा विष्णु की तरह शरीरधारी है इन्हे "महादेव" कहा जाता है परन्तु इन्हे "परमात्मा" नही कहा जा सकता
०२. यह ब्रह्मा देवता तथा विष्णु देवता की तरह सूक्ष्मलोक में शंकरपुरी में निवास करते है I
०३. ब्रह्मा देवता तथा विष्णु देवता की तरह यह भी परमात्मा शिव की रचना है I
०४. यह केवल महाविनाश का कार्य करते है, स्थापना और पालना कस कर्तव्य इनके कर्तव्य नही है I
परमपिता परमात्मा शिव
०१. यह चेतन्य ज्योति-बिंदु है और इनका अपना कोई स्थूल या सूक्ष्म शरीर नही है, यह परमात्मा है I
०२. यह ब्रह्मा, विष्णु तथा शंकर के लोक, अर्थात सूक्ष्म देव लोक से भी परे ब्रह्म लोक ( मुक्तिधाम) में वास करते है I
०३. यह ब्रह्मा, विष्णु तथा शंकर के भी रचयिता अर्थात "त्रिमूर्ति" है I
०४. यह ब्रह्मा द्वारा स्थापना, शंकर द्वारा महाविनाश और विष्णु द्वारा विश्व का पालन करके विश्व का कल्याण करते है I
शिव का जन्मोत्सव रात्रि में क्यों ?
"रात्रि" वास्तव में अज्ञान, तमोगुण अथवा पापाचार की निशानी है I अत: द्वापरयुग और कलियुग के समय को "रात्रि" कहा जाता है I कलियुग के अंत में जबकि साधू,सन्यासी,गुरु,आचार्य इत्यादि सभी मनुष्य पतित तथा दुखी होते है और अज्ञान निंद्रा में सोये पड़े होते है, जब धर्म की ग्लानी होती है और जब यह भारत विषय-विकारो के कारकं वैशाली बन जाता है, तब पतित-पावन परमपिता परमात्मा शिव इस सृष्टि में दिव्य जन्म लेते है I इसलिए अन्य सबका जन्मोत्सव तो "जन्म दिन" के रूप में मनाया जाता है परन्तु परमात्मा शिव के जन्म दिन को "शिवरात्रि" ही कहा जाता है अत: यहाँ चित्र में जो कालिमा अथवा अंधकार दिखाया गया है वह अज्ञान अंधकार अथवा विषय-विकारो की रात्रि द्योतक है I
ज्ञान-सूर्य शिव के प्रकट होने से सृष्टि से अज्ञानान्धकार तथा
विकारो का नाश
जब इस प्रकार अवतरित होकर ज्ञान-सूर्य परमपिता परमात्मा शिव ज्ञान प्रकाश देते है तो कुछ ही समय में ज्ञान का प्रभाव सारे विश्व में फ़ैल जाता है और कलियुग तथा तमोगुण के स्थान पार संसार में सतयुग और सतोगुण की स्थापना हो जाती है और अज्ञान अंधकार का तथा विकारो का विनाश हो जाता है I सारे कल्प में परमपिता परमात्मा शिव के एक अलौकिक जन्म से थोड़े ही समय में यह सृष्टि वैश्यालय से बदल कर शिवालय बन जाती है I और नर को श्री नारायण तथा नारी को श्री लक्ष्मी पद की प्राप्ति हो जाती है इसलिए शिवरात्रि हीरे तुल्य है I

1 comment:

  1. shiv aur shankar ek hi roop hai shankar shiv ka hi saroop hai jaise mahesh,triambakam,gangadhar,mahakaal aadi thik usi parkar jaise vishnu ke kai naam hai ram,krishna,narshima kachyap aadi 12 jyotirlingu main alag swaroop hai anyatha ganesh kiske putra hai shiv ke ya shankar ke shayad aap kahe ke parvati ke (lalitsaxena61@gmail.com) please reply main bhi es bhed ko samjhna chataa hu koi samjha nahi paataa

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