Sunday, October 24, 2010

मात्मा कौन है और कैसा है??

परमात्मा कौन है और कैसा है?? परमात्मा कौन है और कैसा है?? ये सवाल अक्सर हमारे मन में आता है, इसके अलग अलग मान्यताएं है ! पर ब्रह्मा कुमारीज के अनुसार परमात्मा आत्मा की ही तरह है जैसा की आत्मा के बारे में पिछली पोस्ट में बताया था की आत्मा एक ज्योतिस्व Inbox
BK Bhagwan Bhai Mon, Mar 8, 2010 at 10:06 AM
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परमात्मा कौन है और कैसा है?? परमात्मा कौन है और कैसा है?? ये सवाल अक्सर हमारे मन में आता है, इसके अलग अलग मान्यताएं है !
पर ब्रह्मा कुमारीज के अनुसार परमात्मा आत्मा की ही तरह है जैसा की आत्मा के बारे में पिछली पोस्ट में
बताया था की आत्मा एक ज्योतिस्वरूप अंडाकार और अति सूक्षम जो स्थूल आँखों से देखि नहीं जा सकती, है|
ठीक परमात्मा का भी वैसा ही आकार वैसा ही रूप और उतने ही सूक्ष्म है|
क्यूंकि परमात्मा हम सभी आत्माओं के पिता है|जैसे लौकिक में आदमी और उसकी संतान आदमी ही होती है,
गाय की बाछी गाय ही ही होती है,ठीक उसी प्रकार आत्मा के पिता परमात्मा भी आत्मा जैसे ही होते हैं|
फर्क है तो ये की उनकी सक्तियाँ असीमित है आत्मा ज्ञान स्वरुप है तो परमात्मा ज्ञान के सागर है,
आत्मा शांति स्वरुप है तो परमात्मा शांति के सागर हैं|
आत्मा प्रेम स्वरुप है तो परमात्मा प्रेम के सागर है |
कहने का तात्पर्य ये की परमात्मा सभी दिव्य गुणों के सागर हैं, और सृष्टि के रचियता है|
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B. K. BHAGWAN, SHANTIVAN, +919414534517, +919414008991

5 comments:

  1. नैतिक मूल्यो से सर्वांगीण विकाश - भगवन भाई
    चिरकुंडा ०८ जनुअरी :- बचो के सर्वांगीण विकाश के लिये भौतिक शिक्षा के साथ साथ नैतिक शिक्षा कि भी आवशकता है। नैतिक शिक्षा से ही सर्वांगीण विकाश सम्भब है। उक्त उडगर प्रजापिता ब्रम्हा कुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय माउंट अबु राजस्थान से प्रधार हुए राज योगी ब्रम्हा कुमार भगवन भाई कहे। वे बुधवार को साहू कॉलेज और कुमारधुबी हाई स्कूल के छात्र - छात्रो" शिकचको कि जीवन में नैतिक शिक्षा का महत्व" विषय पर छात्रो को सम्बोधित करते हुये बोल रहे थे। भगवन भाई ने कहा कि शेक्षाक्निक जगत में विदार्थीओ के लिए नैतिक मूल्य को जीवन में धारण करने कि प्रेरणा देना आज कि आवस्यकता है। उन्होंने कहा कि नैतिक मूल्यो कि कमी येही वक्तिगत सामाजिक पारिवारिक राष्ट्रीय एवांग अंतररास्ट्रीय सर्व समश्याओं का मूल कारन है। विद्यार्थियो का मूल्याङ्कन , आचरण , अनुशरण , लेखन - बेवहारिक ज्ञान एवअंग अन्य बातो के लिए प्रेरणा देने कि आवशकता है। ज्ञान कि बैख करते हुए उन्होंने बताया कि जो शिक्चा विद्यार्थियो को अंधकार से प्रकाश कि और असत्य से सत्य कि और बंधनो से मुक्ति कि और ले जाए वही शिक्चा है। उन्होंने कहा कि अपराध मुक्त समझ के लिए शंकरित शिक्चा जरुरी है।

    गुणवान बच्चे देश कि संपत्ति है
    भगवन भाई ने कहा कि आज कि बच्चे कल का भावी सकमज है। अगर कल के भावी समाज को बेहतर बनाना चाहते हो तो स्कूल के माध्यमो से इन्ही बच्चो को नैतिक सद्गुणो कि शिक्चा कि अधर से चरितवन बनाए। तब समझ बेहतर बन सकता है गुणवान व चरितवन बच्चे देश कि सच्ची संपत्ति है। उन्होंने बताया कि एसे गुणवान और चरितवन बच्चे देश और समाज के लिए कुछ रचनात्मक कर्ज कर सकते है।
    उन्होंने भारतीय संस्कृति को याद दिलाते हुए कहा कि प्राचीन सांस्कृति आध्यात्मिकता कि रही जिस कारन प्राचीन मानव भी बंदनीय है और पूजनीय रहा। उन्होंने बताया कि नैतिक शिक्चा से ही मानव के बेभर में निखार अत है।
    कुसंग , सिनेमा , वेसन फर्शों से युवा भटके
    ब्रह्माकुमार भगवन भाई ने कहा कि वर्त्तमान समय कुषाणग , सिनेमा , व्यशन और फैशन से युवा पिरि भटक रही है। अध्यात्मिक ज्ञान और नैतिक शिक्षा के दयारा युवा पिरि को नै दिशा मिल सकती है। उन्होंने बताया कि सिनेमा , इंटरनेट व टीवी कि माध्यम से युवा पिरि पर पश्चात सांकृति का आघात हो रहा है। इस आघात से युवा पिरि को बचने कि आवश्यता है। उन्होंने बताया कि युवा पिरि को कुछ रचनात्मक कर्ज सिखाए तब उनकी शक्ति सही उपयोग में ला सकेंगे। बरिष्ट राजयोगी ब्रह्मा कुमार भगवन भाई ने कहा कि हमारे मूल्य हमारी विरासत है। मूल्य कि संस्कृति के कारन आज भारत कि विषय में पहचान है। इसलिए नैतिक मूल्य , मानवीय मूल्य़ो कि के लिए सभी को सामूहिक रूप में प्रयास करना चाहिए। उन्होंने कहा कि मनुष्यो कि सोच ही उसके कर्मो का अधर बनता है इसकिये हमे अपने कर्मो पर ध्यान देना चाहिए कि हमारे कर्म विषय के लिए हितकारी हो।
    सकारात्मक चिंतन का महत्य बताते हुए उन्होंने कहा कि सकारात्मक चिंत्तन से समाज में मूल्यो कि खुश्बू फैलते है। सकारात्मक चिंतन से जीवन कि हर समस्याओ का समाधान होता है। उन्होंने शिक्षा का मूल उद्देश बताते हुए कहा कि चरितवन , गुणवान बनना ही शिक्षा का उद्द्येश है। उन्होंने अड्यात्मिकता को मूल्यो का स्रोत बताते हुए कहा कि शांति, एकाग्रता , ईमानदारी , ध्यराजता , सहनशीलता अदि सद्गुण मानव जाती का श्रीनगर है ,
    शतानी ब्रह्माकुमारी राजयोग सेवा केंद्र कि बक अनीता बहिन ने अपना उद्बोध देता हुए कहा कि कुशांग , सिनेमा , वसंह और फैशन से वर्त्तमान युवा पिरि भटक रही है। चरितवन बन्ने के किये युवा को इसीसे दूर रहना है। अपराध मुक्त समाज के लिए चरितवन बनो। उन्होंने राज योग का महत्व बताते हुए कहा कि राजयोग से एकहराता आयेगी।
    प्रधनाचार्य र बी साहू ने अपना उद्बोधन देते हुए कहा कि वर्त्तमान समय बच्चो को नैतिक शिक्षा दयारा चरितवन बनाने कि बहुत अवस्ता है। उन्होंने ब्रह्मा कुमार भगवन भाई का स्वागत किया। प्रधानाचार्य मिश्रा जी ने धन्यवाद ज्ञापन किया। इस कर्ज करम में ब क पिंकी , बी क सुनीता , रघुपति भाई अदि उपश्थित थे

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  2. आधुनिक जीवन शैली तनाव पैदा कर रही है। तनाव का सीधा संबंध बीमारी से है। राजयोग में मेडिटेशन के अभ्यास द्वारा हम अपने मनोबल को मजबूत कर तनाव से मुक्त रह सकते हैं। प्रजापिता ब्रह्म कुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय माउंट आबू के राजयोगी ब्रह्मकुमार भगवान भाई ने बुधवार को स्थानीय ब्रह्म कुमारी राजयोग केंद्र पर जीवन में राजयोग का महत्व विषय पर विचार व्यक्त करते हुए कहे।

    उन्होंने कहा कि तनाव से बचने के लिए जीवन शैली में बदलाव की आवश्यकता है। तनाव का कारण प्रत्येक व्यक्ति का अलग-अलग है। तनाव का मुख्य कारण मन में उठने वाले नकारात्मक विचार है। नकारात्मक विचारों से आपसी व्यवहार में कटुता आती है। नकारात्मक विचारों से घृणा, नफरत, वैर, विरोध, क्रोध आदि उत्पन्न होता है। नकारात्मक विचारों से दृष्टि और दृष्टिकोण और व्यवहार भी नकारात्मक बनता है जिससे मन में तनाव निर्माण होता है।

    भगवान भाई ने कहा कि राजयोग के अभ्यास द्वारा मनोबल को मजबूत कर तनाव से मुक्ति पाई जा सकती है। तनाव के कारण मानसिक और शारीरिक अनेक बीमारियां होने की संभावना होती है। उन्होंने राजयोग को तनाव मुक्ति की संजीवनी बूटी कहते हुए उन्होंने कहा कि राजयोग का अभ्यास करने से आंतरिक शक्तियां जागृत होती हैं जिससे तनाव पर काबू पाया जा सकता है। स्थानीय ब्रह्म कुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की मनीषा बहन ने ईश्वरीय महावाक्य सुनाते हुए कहा कि वर्तमान समय तनावपूर्ण परिस्थिति में सकारात्मक विचारों की आवश्यकता है। सत्संग के माध्यम से सकारात्मक विचार आते हैं।

    ब्रह्मकुमारी राजयोग केंद्र पर जीवन में राजयोग का महत्व बताते भगवान भा

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  3. कारा गृह है परिवर्तन की तपोस्थली : भगवानभाई
    Bhaskar News Network | Jan 13, 2014, 03:32AM IST
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    > कैदियों के बीच संस्कार परिवर्तन एवं व्यवहार शुद्धि कार्यशाला
    भास्कर न्यूज - बोकारो
    कर्मों के आधार पर ही संसार चलता है। कर्मों से ही मनुष्य महान बनता है। कर्मों से ही कंगाल बनता है। उक्त बातें प्रजापिता ब्रह्मकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय माउंटआबू से आए राजयोगी ब्रह्मकुमार भगवान भाई ने कही। वे मंडल कारा चास में कैदियों को संस्कार परिवर्तन एवं व्यवहार शुद्धि विषय पर संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि कर्म से ही मनुष्य डाकू से ऋषि बन जाता है। डाकू से वाल्मीकि बन कर उन्होंने रामायण लिख डाली। उन्होंने कहा मनुष्य जीवन बड़ा अनमोल है। इसे व्यर्थ गंवाना नहीं चाहिए। उन्होंने कहा कि मनुष्य की गलतियां ही उसे सही रूप में इंसान बनाती हैं। केवल हमें उन गलतियों को स्वयं ही महसूस कर उसे बदलने की आवश्यकता है। उन्होंने कैदियों से कहा कि कारागृह उनके लिए तपोस्थली है। यहां एकांत में बैठकर स्वयं के बारे में सोचने और टटोलने का मौका मिलता है। उन्हें सोचना है कि कि उनके जीवन का उद्देश्य क्या है। भगवान ने उन्हें किस उद्देश्य से इस संसार में भेजा है और वे यहां आकर क्या कर रहे हैं। ऐसा चिंतन कर अपने व्यवहार और संस्कारों में परिवर्तन कर अच्छा इंसान बन सकते हैं। स्थानीय ब्रह्मकुमारी ईश्वरीय सेवाकेंद्र के बीके शैलेश भाई, जेलर श्रीकांत सिन्हा और डा. केके दास ने भी कैदियों को चिंतन कर सुधार लाने की अपील की।

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  4. विकारों के त्याग से प्रसन्न होते हैं भोले
    Dainik Jagran के द्वारा | जागरण – मंगल., २५ फरवरी २०१४

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    विकारों के त्याग से प्रसन्न होते हैं भोले

    बदायूं : शहर के ब्रह्माकुमारी केंद्र पर हुए कार्यक्रम में शिवरात्रि त्योहार के विषय में विस्तार से बताया गया। राजयोगी ब्रह्माकुमार भगवान भाई ने शिवरात्रि के बारे में बताते हुए भगवान भोले शंकर का गुणगान किया।

    सोमवार को हुए कार्यक्रम के दौरान राजयोगी ब्रहम्कुमार भगवान भाई ने भक्तों से कहा कि वह भोलेनाथ को प्रसन्न करना चाहते हैं तो अपने आंतरिक विकारों का त्याग करें। यह विकार काम, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार, ईष्र्या, घृणा और नफरत ही मनुष्य के पतन के कारण बनते हैं। बताया कि महा शिवरात्रि एक सार्व- भौमिक त्योहार है। हम सभी मनुष्य आत्माओं के आत्मिक पिता, परमात्मा के अवतरण का यादगार पर्व है। उन्होंने कहा कि यह त्योहार हमें भाईचारे की स्मृति दिलाता है। महाशिवरात्रि अर्थात ही स्वयं में जागृति लाना है कि मैं कौन हूं, कहां से आया हूं, मेरा आत्मिक पिता कौन है, अब कौनसा सम चल रहा है। उन्होंने बताया कि जब मनुष्य यह सबकुछ भूल जाता है तब ऐसे अज्ञान अंधकार के रात्रि में परमात्मा शिव का अवतरण होता है। इसका यह यादगार पर्व है। उन्होंने बताया कि हमें अब मन और बुद्धि से उस निराकार परमपिता शिव को याद करना है यही वास्तव में उपवास है। शिवजी पर बेर चढ़ाते हैं तो हमें अपने आंतरिक बैर को छोड़ना है, यही वास्तव में बेर चढ़ाना है। शिव को प्रसन्न करने के लिए हमें बुराईयों को त्यागने की प्रतिज्ञा करनी है। इधर, राजकीय कन्या इंटर कालेज, राजकीय इंटर कालेज और शिवदेवी स्कूल में हुए नैतिक शिक्षा अभियान कार्यक्रम में भगवान भाई ने नैतिक मूल्यों के बारे में बताया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि जितना हम स्वयं को और दूसरों को यथार्थ के रूप में जानते हैं, उतना ही हमारे अंदर नैतिक मूल्य आना शुरू हो जाता है। स्वयं को दूसरों का जीवन चक्र का यथार्थ जानना ही आध्यात्मिता है। उन्होंने कहा कि मूल्यों का आधार विवेक आध्यात्मिकता से विवेक जाग्रत होता है और भौतिकता से विवेक भ्रष्ट होता है। इसलिए आज समाज में भौतिकता का पलड़ा भारी है। इसी वजह से नैतिक मूल्यों में गिरावट आई है। उन्होंने कहा कि नैतिक मूल्य माना मानव उत्थान के लिए लागू किए गए नियम हैं अगर हम अपने जीवन का उत्थान चाहते हैं तो चरित्रवान बनना चाहते हैं तो स्वीकार करने में कोई हर्ज नहीं है। इस मौके पर प्रधानाचार्या नूतन रानी, बीके सक्सेना, बीके आनंद, सीपी सक्सेना ने भी विचार व्यक्त किए।

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  5. सुख-शांति के लिए सत्संग जरूरी'
    Mon, 10 Mar 2014 07:29 PM (IST)

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    संस, इंद्री : प्रजापिता ब्रह्माकुमारी आश्रम की ओर से नन्हेड़ा गांव में सत्संग का आयोजन किया गया। राजयोगी ब्रह्माकुमार भगवान भाई ने कहा कि भौतिक युग में स्थानीय सुख-शांति के लिए सत्संग जरूरी है। सत्संग के माध्यम से इस संसार में किस तरह जीना है, क्या बात कहनी और करनी है। आपसी व्यवहार कैसा करना है इसका ज्ञान प्राप्त होता है। सत्संग से प्राप्त दिव्य ज्ञान के माध्यम से अपने व्यवहार में निखार लाकर एक सदगुणी इंसान बन सकते हैं।

    उन्होंने कहा कि ज्ञान की कमी के कारण वर्तमान समय में मानव के अंदर काम, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार, ईष्र्या, घृणा व नफ रत की प्रवृति बढ़ती जा रही है। इस वजह से समाज में दिन-प्रतिदिन अपराध बढ़ते जा रहे है। सत्संग से मिले सदगुण, विवेक व शक्तियां से कर्मो में सुधार ला सकते हैं। इनकों ना तो कोई चोर चुरा सकता है और न ही आग जला सकती है। किरण बहन ने राजयोग की विधि बताते हुए कहा कि यदि मनुष्य परमात्मा की शरण में नहीं आता तो उसे विकारों से छुटकारा मिलना मुश्किल है। बीके रजना व बीके विजय भाई ने गीत के माध्यम से गुरु की महिमा का बखान किया।

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